दिल की हसरत जुबां पर आने लगी
तुझे देख ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी
वो तेरी मोहबत थी या मेरी दीवानगी
जो हर सूरत में तेरी सूरत नज़र आने लगी
दुआ गर मैं कोई मांगता खुदा से
तो शायद कुछ भी कबूल हो जाती
हाथ पसारने से पहले ही
मन में तुम मुस्काने लगी
दरगाह पर तो हम भी गए थे
सजदा करने को हुज़ूर के लिए
तुम्हें देख के न जाने क्यों
हल्की सी शर्म आने लगी
नज़र उठी तो सामने तुम थे
नज़र झुकी तो तुम्हारा साया
नज़र फिरी तो तुम्हारी याद
रह रह कर तरसने लगी
दिल की हसरत जुबां पर आने लगी
तुझे देख ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी