आज फिर रात वही दिन वही दिन मेरे जीवन में आया
वही दिन मेरे जीवन में आया
नहीं था फिर मुझ पे उसका साया
विश्वास के दुश्मन ने फिर मौका पाया
उसके सामने तो वादे किये थे प्यार के
वादे वादे न रहे बन गए धोखे यार
मैने भी कुछ ऐसा ना कहा
पर दे गया दोस्त फिर एक इशारा बेरुखी का
मैं सोच तो ना पाया पर फिर भी सोचा
क्या ऐसा भी हो सकता है?
नहीं था जवाब मेरे मन का
हुआ तो पहेली भी था
पर तब बात कुछ और थी
तब तो था उसका साया
दोस्त की बात कुछ और थी.
है प्रार्थना यही तुझसे ऐ मेरे मालिक
न दोस्त चाहिए ना दुश्मन
वो साया दे दे जो है ज़िंदगी मेरी
जो है ज़िन्दगी मेरी वो साया दे दे
है ख़ुशी मेरी मुझे तू किनारा दे दे
दोस्त को दे सब खुशियाँ जीवन की
चाहे तो मुझ से जीवन भी ले ले
ले ले सूर्य की रौशनी चन्द्र की चांदनी
यार के लिए
केवल दुनिया को बना दे
प्यार के लिए
हमें तो तेरी यादों में भी वो ही महक आती है .... नितेन