ये जो हल्की सी मुस्कान तुम्हारी
बालों में छुपी जाती है
मुझे बार बार बेलों में
मुस्कुराते हुए मोतिये की याद दिलाती है l
खुशबु यूं ही ही तुम बिखेर देती हो सब के लिए
बालों में छुपी जाती है
मुझे बार बार बेलों में
मुस्कुराते हुए मोतिये की याद दिलाती है l
खुशबु यूं ही ही तुम बिखेर देती हो सब के लिए
पर फिर ये मुस्कान कम नहीं हो पाती है l
ये जो हल्की सी मुस्कान तुम्हारी ll
कभी अपनी पाक रंगत से
ये जो हल्की सी मुस्कान तुम्हारी ll
कभी अपनी पाक रंगत से
खिला देती है महफ़िल का यौवन
और कभी झुण्ड सी बन कर
सजा जाती है श्रधा का चमन l
ये जो हल्की सी मुस्कान तुम्हारी l
कहीं कोमल पंखड़ियों को खिला कर
ये जो हल्की सी मुस्कान तुम्हारी l
कहीं कोमल पंखड़ियों को खिला कर
भर देती है कोमल बचपन
और कभी सेज पे सज कर
बन जाती है नव जीवन का मधुबन l
ये जो हल्क्की सी मुस्कान तुम्हारी ll
सज्जा सँवरा रूप खिला कर
ये जो हल्क्की सी मुस्कान तुम्हारी ll
सज्जा सँवरा रूप खिला कर
हो जाती है इश्वर को अर्पण
और कभी पिरोई माला बन कर
खिला देती है वीरों का दामन l
ये जो हल्क्की सी मुस्कान तुम्हारी ll
अपनी भीनी भीनी कुश्बू से
ये जो हल्क्की सी मुस्कान तुम्हारी ll
कभी तो ह्रदय को मोह जाती है
और कभी रूह का रस बरसा कर
दुखों को धो जाती है l
ये जो हल्की सी मुस्कान तुम्हारी
बालों में छुपी जाती है
मुझे बार बार बेलों में
मुस्कुराते हुए मोतिये की याद दिलाती है ll
OH MY GOD !!!THAT WAS JUST BRILLIANT !!!!!
जवाब देंहटाएंWOW !!!!!!