शनिवार, 3 सितंबर 2011

आप जो यूं हमसे मिले



आप जो यूं हमसे मिले 



                                        आप के दीदार से

औरों  का तो हमने 

दीदार छोड़ दिया 


आप जो यूं हमसे मिले 


कोई और दिल में

बसर होता  तो कैसे 

सारा जूनून 

आप पर वार छोड़ दिया


आप जो यूं हमसे मिले 


सुरूर  और आता  भी  तो कैसे 

जब हुस्ने जाम की खुशबू छु गयी 

हमने  तो पीना हर  जाम छोड़  दिया


आप जो यूं हमसे मिले 


स्याह रातों से सिमट गए 

अंजन की तरह 

सुर्ख लबों को देख जब

आफ़ताब का दीदार छोड़ दिया


आप जो यूं हमसे मिले 


दीवाना कहा कर पुकारा 

जब आपने

दिवानगी  से भी हमने 

हर दूसरा मकाम छोड़ दिया


आप जो यूं हमसे मिले 


गर आप मिल जाएँ 

तो  मुकद्दर है

नहीं यही सुनेंगे की

खुदा के लिए संसार छोड़  दिया

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