तुम बहुत करीब हो
मगर पास नहीं
तुम्हें देख सकते हैं
मगर छूने का अहसास नहीं
तुम बहुत करीब हो
मगर पास नहीं
माना के हर कतरे में
हो तुम एक समुन्दर की तरह
माना के हर कतरे में
हो तुम एक समुन्दर की तरह
पर समुन्दर से बुझती कभी
प्यास नहीं
तुम बहुत करीब हो
मगर पास नहीं
दर्द की दीवारों से
घिरा है अंजुमन
दर्द की दीवारों से
घिरा है अंजुमन
तोड़ पाएं इन दीवारों को
हमें आस नहीं
तुम बहुत करीब हो
मगर पास नहीं
दिल कहाँ और
नसीब कहाँ
दिल कहाँ और
नसीब कहाँ
कभी मिल पायेगा मुकद्दर
है अहसास नहीं
तुम बहुत करीब हो
मगर पास नहीं
नज़दीक गर न आ
पाए कभी
नज़दीक गर न आ
पाए कभी
देख कर दूर से सजदा करें
यही आभास सही
तुम बहुत करीब हो
मगर पास नहीं
very touchin....and very very beautiful....
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