My Writings and Collections
गुरुवार, 25 मार्च 2010
नज़र
मुझे हर एक नज़र न देख पाई
न देख पाई मुझे खुद की भी नज़र
जो देख पाई मुझे वो इक नज़र
जो नज़र
नज़र नज़र में दास्तां कह गयी
1 टिप्पणी:
anjali
27 मार्च 2010 को 10:04 pm बजे
very cool...........and says a lotttttttttt......
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very cool...........and says a lotttttttttt......
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