जब कभी लब पे तेरा नामे वफ़ा आता है...
धन के घंगोर घटाएं हैं ना हुन के बादल...
सोने चाँदी के गली-कूचे न हीरों के महल...
आज भी जिस्म के अम्बार हैं बाजारों में...
ख्वाजा-ए-शहर है हुस्न के खरीदारों में...
प्यार की आँख भर आती है कँवल खिलते हैं...
जब कभी लब पे तेरा नामे वफ़ा आता
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