रविवार, 28 मार्च 2010

अनोखा साया

आज फिर रात वही दिन वही दिन मेरे जीवन में आया
वही दिन मेरे जीवन में आया
नहीं था फिर मुझ पे उसका साया
विश्वास के दुश्मन ने फिर मौका पाया
उसके सामने तो वादे किये थे प्यार के
वादे वादे न रहे बन गए धोखे यार
मैने भी कुछ ऐसा ना कहा 
पर दे गया दोस्त फिर एक इशारा बेरुखी का
मैं सोच तो ना पाया पर फिर भी सोचा
क्या ऐसा भी हो सकता है?
नहीं था जवाब मेरे मन का
हुआ तो पहेली भी था 
पर तब बात कुछ और थी 
तब तो था उसका साया
दोस्त की बात कुछ और थी.
है प्रार्थना यही तुझसे  मेरे मालिक
न दोस्त चाहिए ना दुश्मन
वो साया दे दे जो है ज़िंदगी मेरी
जो है ज़िन्दगी मेरी वो साया दे दे
है ख़ुशी मेरी मुझे तू किनारा दे दे
दोस्त को दे सब खुशियाँ जीवन की
चाहे तो मुझ से जीवन भी ले ले
ले ले सूर्य की रौशनी चन्द्र की चांदनी
यार के लिए
केवल दुनिया को बना दे 
प्यार के लिए

1 टिप्पणी:

  1. .........mat itna tum socho ....uski bhi koi majboori rahi hogi.........
    god nitin...........this can b felt coming rite from ur heart........

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