तेरे साथ वो ऊपर वाला है
मत भूल आज अगर है घनघोर रात्रि
हर रात्रि का अंत सौर्य उजाला है
जंग अगर है लड़नी तो
अपनी मलीनता पर पहला वार कर
है अगर विजय देखनी तो
तो अपनी शक्ति को तैयार कर
दे दे की ना तू पुकार कर
स्व-बल और स्वावलंबन पर विश्वास कर
छोड़ दे तू सर झुकाना
अपने अंतर्धाम को नमस्कार कर
सुख और दुख के भय से
क्यों खुद को डराता है
है आग जो तेरे अन्दर
क्यों नहीं उसे जगाता है
मत प्रेम कर तू शांति से
शांत मन तो सुलाने वाला है
मत भूल के जीवन में
स्व-भय ही तुझे जगाने वाला है
मत घबराना जीवन के दुखों से
तेरे साथ वो ऊपर वाला है
मत भूल आज अगर है घनघोर रात्रि
हर रात्रि का अंत सौर्य उजाला है
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